महावीर कोलवाशरी की जनसुनवाई में “हंगामे की आसार”, कोलवाशरी क्षेत्र में जबरदस्त विरोध और आक्रोश, प्रबंधक पर वादा पूरा नहीं करने का भी आरोप, जिला प्रशासन भी गुपचुप तरीके से करना चाहता है जनसुनवाई, उठ रहे सवाल… प्रचार-प्रसार की भी जरूरत नहीं!

जांजगीर : कोलवाशरी स्थापित करने से पहले क्षेत्र वासियों को बड़े-बड़े वादे किये जाते है. लेकिन कोलवाशरी के द्वारा किसी भी बात पर अमल नहीं किया जाता. ऐसा हम नहीं बलौदा क्षेत्र में स्थित महावीर कोलवाशरी क्षेत्र के लोगों को कहना है. क्यों कि अभी 11 फरवरी को फिर से महावीर कोलवाशरी ने जनसुनवाई रखी है. ऐसे में क्षेत्रवासी इसका जमकर विरोध कर रहे हैं और उनमें जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहे हैं, क्योंकि महावीर कोलवाशरी प्रबंधक, कोलवाशरी स्थापित करने से पहले कई वादे किए थे. लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया, फिर से वही दौर आने वाला है और सबसे बड़ी बात जिला प्रशासन भी गुपचुप तरीके से इस जनसुनवाई को करने जा रहा है. जनसुनवाई के लिए प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया है, ऐसे में आप जिला प्रशासन की गंभीरता को भी समझ सकते हैं.
लोगों ने कहा है कि 11 फरवरी को जांजगीर में जाज्वल्यदेव महोत्सव की शुरुआत होगी और जनसुनवाई के वक्त क्षेत्रवासी मेले में मौजूद रहेंगे. ऐसे में जनसुनवाई बिना किसी विरोध के सम्पन्न की जा सकती है, जिसे लेकर जिला प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और लोगों में आक्रोश दिख रहा है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि जाज्वल्य मेले के शुरुआत के दिन ही जनसुनवाई करना लोगों को इस मुद्दे से हटाना है. लेकिन क्षेत्रवासियों ने ठाना है कि इस बार इस जनसुनवाई का जमकर विरोध किया जाएगा. चाहे जिला प्रशासन कोलवाशरी को सह दे, हालांकि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है कि आखिर 11 फरवरी को ही जनसुनवाई क्यों किया जा रहा है?.
नियम : कोलवाशरी की जनसुनवाई, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसमें प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों, नागरिकों से उनके पक्ष, आपत्तियां और सुझाव लिखित या मौखिक रूप से सुने जाते हैं. इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की चिंताएं जैसे प्रदूषण, फसल क्षति, और स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होता है, जिसे जिला प्रशासन व पर्यावरण विभाग द्वारा लिपिबद्ध किया जाता है।
