देश के पहले किसान स्कूल की बड़ी प्रसिद्धि, इस अनोखे किसान स्कूल में किसानों को 18 विषयों में दी जाती है निःशुल्क जानकारी, अब तक पहुंच चुके 6 देशों के किसान

जांजगीर-चाम्पा जिले के बहेराडीह गांव में देश का पहला ‘किसान स्कूल’ संचालित है, जिसे विशेषज्ञ किसान ही संचालित करते हैं. किसान स्कूलों में किसानों को 18 विषयों की जानकारी निःशुल्क मिलती है. किसान स्कूल में छग के अलावा दूसरे प्रदेशों से भी किसान पहुंचते हैं और जानकारी अर्जित करते हैं. आज इस अनोखे किसान स्कूल की खूब चर्चा है. यहां के नवाचार को देखकर सभी तारीफ करते हैं. बड़ी बात यह है, यहां 6 देश के किसान आ चुके हैं.

ये तस्वीर है, देश के पहले किसान स्कूल की, जहां पढ़ाने वाले भी किसान और पढ़ने वाले भी किसान. विशेषज्ञ किसानों की टीम है, जो किसानों को 18 विषय या यूं कहें 18 प्रकार की खेती के बारे में निःशुल्क जानकारी देते हैं. किसानों के द्वारा संचालित किसान स्कूल की खासियत यह भी है कि खेती की पुरानी सामग्री को किसानों ने धरोहर के रूप में संजोकर रखा है. किसान स्कूल में जो भी पहुंचता है, वह खुद को किसानों के बेहतरीन प्रयास की तारीफ करने से रोक नहीं पाता.

बहेराडीह गांव के प्रगतिशील किसान दीनदयाल यादव ने देखा कि कई बार सरकारी तौर पर किसानों को व्यापक जानकारी नहीं मिलती. यहीं से किसान दीनदयाल यादव को यह यूनिक आईडिया आया और किसानों की टीम बनाकर 23 दिसम्बर 2021 को राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर किसान स्कूल की शुरुआत की.

किसान स्कूल में जिस तरह किसानों ने अपने स्तर पर अन्य किसानों के सीखने का तरीका इजात किया है, उसे देखकर हर कोई गदगद रह जाता है. इसके बाद, किसानों का उत्साह बढ़ा और फिर किसानों की टीम ने जिले के साथ ही अन्य जगहों से आने वाले किसानों को खेती के गुर सीखाने की दिशा में कई कदम उठाए. किसान दीनदयाल यादव ने किसान स्कूल में छत्तीसगढ़ की 36 भाजी को संग्रहित करके रखा है, जिसे देखकर हर कोई उत्साहित हो जाता है. इसी तरह 9 तरह की मिर्च है, जिसके बारे में जानने की उत्सुकता रहती है. किसान स्कूल की छत को किचन गार्डन के रूप में विकसित किया गया है. दूसरी ओर, किसान स्कूल के दूसरे एरिया में गोमूत्र से नीमसार बनाया जाता है, वहीं गोबर गैस का सिस्टम लगा है. साथ ही, अक्षयचक्र कृषि मॉडल की बाड़ी को विकसित किया गया है, जहां बहुत ही कम ही जगह में कई लेयर में मंजिल दर मंजिल उद्यानिकी खेती की जा रही है. इसे भी देखने किसान पहुंचते हैं.

किसान स्कूल में 18 विषयों में किसानों को जानकारी दी जाती है. खास बात यह है कि किसान स्कूल में निःशुल्क जानकारी लेने के लिए या यूं कहें पढ़ाई के लिए ना तो कोई उम्र की बाध्यता है और ना ही शिक्षा की. यहां अंगूठे छाप किसान को भी जानकारी मिलती है. किसान स्कूल संचालित कर रहे किसानों ने इसी ध्येय से किसान स्कूल की शुरुआत की है कि किसानों को हर तरह की जानकारी मिले और अनुभवी किसानों के द्वारा पूरी जानकारी दी जाती है.

किसान स्कूल की प्रसिद्धि इसी बात से समझी जा सकती है कि जिले के अलावा बाहर से भी किसान पहुंच रहे हैं और खेती के गुर सीख रहे हैं. किसान स्कूल में एग्रीकल्चर कॉलेज के स्टूडेंट से लेकर दूसरे राज्यों से किसान, जिज्ञासा के साथ पहुंचते हैं और समाधन पाकर काफी खुश होते हैं. निःशुल्क जानकारी मिलने से किसानों के द्वारा स्थापित इस किसान स्कूल ने नवाचार के दम पर देश-दुनिया में बड़ी पहचान बना ली है.

बहेराडीह गांव के प्रगतिशील किसान दीनदयाल यादव और अन्य किसानों की टीम ने जिस मंशा से किसान स्कूल की शुरुआत की थी, उसकी सार्थकता दिख रही है. किसान स्कूल में विजिट के लिए जिले के साथ ही छग के अलावा दूसरे प्रदेश के किसान पहुंच रहे हैं और अनुभवी किसानों की टीम से निःशुल्क जानकारी ले रहे हैं. इस तरह खेती की समस्याओं के समाधन के रूप में बहेराडीह गांव के किसान स्कूल की पहचान बन गई है. देश के इस पहले किसान स्कूल के संस्थापक दीनदयाल यादव का कहना है कि किसानों की उन्नति के लिए किसान स्कूल को शुरू किया गया है. वे हमेशा किसानों के हित में काम करते हैं. आज किसान स्कूल में हर दिन किसान या एग्रीकल्चर स्कूल, कॉलेज के साथ अन्य जगह से छात्र और किसान आते हैं.

निश्चित ही किसान स्कूल को शुरू करने वाले किसानों की मेहनत रंग लाने लगी है और किसान स्कूल से लगातार किसान जुड़ रहे हैं. किसानों के लिए बहेराडीह गांव का यह किसान स्कूल वरदान बनते जा रहा है. जैविक खेती के लिए जाने वाले इस बहेराडीह गांव में किसान स्कूल, एक ऐसी उपलब्धि जुड़ गया है, जिसके माध्यम से किसानों के हुनर को तराशा जा रहा है और किसानों में खेती के ऐसे गुर लाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को आगे बढ़ने और खेती को समझने में बड़ी मदद मिल रही है.
