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छत्तीसगढ़

महावीर कोलवाशरी की आज जनसुनवाई, लोगों के विरोध के बाद भी प्रशासन मौन, क्षेत्रवासियों का फूटा गुस्सा, हंगामे की आसार”, जिला प्रशासन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल, पर्याप्त प्रचार-प्रसार भी नहीं!

जांजगीर : बलौदा क्षेत्र में स्थित महावीर कोलवाशरी क्षेत्र के लोगों में जबरदस्त आक्रोश दिख रहा है और आज की जनसुनवाई में हंगामे की आसार है. ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन इस जनसुनवाई को गुपचुप तरीके से कर रहा है. ना तो पर्याय प्रचार-प्रसार की गई और ना ही मुनादी कराई गई, इससे साफ समझा जा सकता है कि जिला प्रशासन का रवैया क्या है? ना तो क्षेत्रवासियों के विरोध के बाद जनसुनवाई की तारीख बदली गई और ना ही उन्हें संतुष किया गया. ऐसे में कोलवाशरी को लाभ होगा और क्षेत्रवासियों के हक पर डांका है.

 

आपको ये भी बता दें कि महावीर कोलवाशरी से क्षेत्रवासी ना खुश हैं और जमकर विरोध कर रहे हैं, उनमें जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहे हैं, क्योंकि महावीर कोलवाशरी प्रबंधक, कोलवाशरी स्थापित करने से पहले कई वादे किए थे. लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया, फिर से वही दौर आने वाला है और सबसे बड़ी बात जिला प्रशासन भी गुपचुप तरीके से, इस जनसुनवाई को करने जा रहा है. लोगों ने कहा है कि 11 फरवरी को जांजगीर में जाज्वल्यदेव महोत्सव की शुरुआत होगी और जनसुनवाई के वक्त क्षेत्रवासी मेले में मौजूद रहेंगे, क्यों की यह मेला किसानों पर आधारित मेला है, ऐसे में जनसुनवाई बिना किसी विरोध के सम्पन्न कराने और उनके हक पर डाला डालने जैसा है. जिसे लेकर जिला प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और लोगों में आक्रोश दिख रहा है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि जाज्वल्य मेले के शुरुआत के दिन ही जनसुनवाई करना लोगों को इस मुद्दे से हटाना है. लेकिन क्षेत्रवासियों ने ठाना है कि इस बार इस जनसुनवाई का जमकर विरोध किया जाएगा. चाहे जिला प्रशासन कोलवाशरी को सह दे, हालांकि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है, आखिर 11 फरवरी को ही जनसुनवाई क्यों किया जा रहा है?.

 

नियम : कोलवाशरी की जनसुनवाई, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसमें प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों, नागरिकों से उनके पक्ष, आपत्तियां और सुझाव लिखित या मौखिक रूप से सुने जाते हैं. इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की चिंताएं जैसे प्रदूषण, फसल क्षति, और स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होता है, जिसे जिला प्रशासन व पर्यावरण विभाग द्वारा लिपिबद्ध किया जाता है. क्षेत्रवासियों के मुताबिक इसपर कोई ध्यान नहीं दिया गया है और इससे जिला प्रशासन को भी कोई सरोकार नहीं है. अगर क्षेत्रवासी मौजूद नहीं रहेंगे तो आखिर ये जनसुनवाई किसके लिए कराई जा रही है.

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