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छत्तीसगढ़

Kisaan School : वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह में राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव 10 दिसम्बर को, महोत्सव में कलेक्टर, एसपी, सीईओ समेत जनप्रतिनिधि होंगे शामिल

जांजगीर-चाम्पा. कृषि विज्ञान केंद्र भारत सरकार के प्राकृतिक क़ृषि गोद ग्राम बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष 10 दिसंबर बुधवार को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन को लेकर प्रदेश की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह का माहौल है. महोत्सव में जिले के कलेक्टर जन्मेजय महोबे समेत पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, जिला पंचायत की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता मिरी, सक्ती जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती द्रौपदी चंद्रा, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग की सदस्य श्रीमती ज्योति कश्यप, पामगढ की पूर्व विधायक श्रीमती इंदु बंजारे, जिला पंचायत के सीईओ गोकुल रावटे शामिल होंगे.

 

 

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष बुधवार 10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शनी लगाई जाएगी. महोत्सव को लेकर प्रदेश की महिलाओं और बिहान की दीदियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है.

 

भाजी दीदियों की होगा सम्मान
किसान स्कूल के संचालक ने बताया कि राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव में विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शन करने वाली अर्थात भाजी प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिलाओं, युवतियों को ‘भाजी दीदी’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा, वहीं प्रतियोगिता में पहला, दूसरा, तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. साथ ही, 7 महिलाओं को सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा. महोत्सव में शामिल होने वाली प्रदेश की महिलाओं ने विविध प्रकार भाजियों के साथ शामिल होने की तैयारी में हैं. पिछले साल भाजी महोत्सव में जिले के अलावा छः जिले की महिलाएं शामिल हुई थीं.

 

 

भाजियों की माला और गुलदस्ता से होगा अतिथियों का स्वागत
किसान स्कूल के सदस्यों ने बताया कि इस बार की भाजी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथियों का स्वागत फूल माला या फूल से बने गुलदस्ता ने नहीं, बल्कि विविध प्रकार की भाजियों के बीजों, पत्तियों तथा तने से निर्मित माला और गुलदस्ता से स्वागत किया जाएगा, वहीं भाजियों से बनाए गए अनेक प्रकार की व्यंजन के स्वाद का आनंद भी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथि लेंगे. इसके साथ ही चेच भाजी और अमारी भाजी के रेशे से तैयार रंग बिरंगी राखियां और कपड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा. महोत्सव में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे.

  1. छत्तीसगढ़ की 36 प्रमुख भाजियों की दिखेगी झलक
    1, मेथी भाजी,
    2, गोंदली भाजी,
    3, मुराई भाजी,
    4, चरौटा भाजी,
    5, मुढ़ी भाजी,
    6, अमारी भाजी,
    7, नोनिया भाजी,
    8, पीपर भाजी,
    9, पोई भाजी,
    10, कांदा भाजी,
    11, गोभी भाजी,
    12, पालक भाजी,
    13, रोपा भाजी,
    14, चना भाजी,
    15, गाँव भाजी,
    16, करेला भाजी,
    17,करमता भाजी,
    18, लाल भाजी,
    19, कोइलार भाजी,
    20, केना भाजी,
    21, अकरी भाजी,
    22, सुनसुनिया भाजी,
    23, मखना भाजी,
    24, भथुआ भाजी,
    25, मुस्केनी भाजी,
    26, बोहार भाजी,
    27, चौलाई भाजी,
    28, खेढ़ा भाजी,
    29, कुरमा भाजी,
    30, कोचाई भाजी,
    31, गुर्रु भाजी,
    32, सरसों भाजी,
    33, तिवरा भाजी,
    34, बर्रे भाजी,
    35, चेच भाजी,
    36, मुनगा भाजी

भाजियों के पेटेंट के लिए प्रयासरत हैं संचालक दीनदयाल यादव
पिछले दिसम्बर 2016 से किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों के साथ ही अन्य फल, फूल पौधों की पेटेंट कराने के लिए स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार के सहयोग से भारत सरकार के केंद्रीय क़ृषि कल्याण मंत्रालय दिल्ली को प्रस्तुत किया है, जिसमें जंगली पीला गेंदा समेत बेल और जामुन का वर्ष 2047 तक पेंटेंट मिल चुका है. शेष अन्य फल, फूल और पौधों के पेंटेंट प्रदान की प्रक्रिया निरंतर देश के अलग-अलग राज्यों के वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही है.

छग ही नहीं, देश भर में किसान स्कूल ने बनाई बड़ी पहचान
वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के नवाचार को सराहना मिल रही है. छग के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भ्रमण के लिए यहां पहुंच चुके हैं, वहीं 6 देशों से किसान यहां के नवाचार को देख चुके हैं. देश के पहले किसान स्कूल को अनोखे तरीके से किसानों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जहां 18 विषयों में किसानों को निःशुल्क जानकारी व ट्रेनिंग दी जाती है. किसान स्कूल में ‘धरोहर’ बनाया गया है, जो आकर्षण का केंद्र है, जहां पुरानी चीजों को संग्रहित कर संग्रहालय का रूप दिया जा रहा है. किसान स्कूल के इस अनोखे प्रयास को देखकर अब तक सभी लोगों ने तारीफ की है और स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए किसान स्कूल ने बड़ी पहचान बना ली है.

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